दीपावली: आस्था, अपनापा आ सामाजिक मेलजोल के सबसे बड़का पर्व
भोजपुरिया समाज में दीपावली: आस्था, अपनापा आ सामाजिक मेलजोल के सबसे बड़का पर्व
दीपावली खाली रोशनी के त्योहार ना, ई भोजपुरिया समाज खातिर आस्था, अपनापा आ सामाजिक मेलजोल के सबसे बड़का प्रतीक मानल जाला। साल भर में जेतना त्योहार आवेला, ओह में एह त्यौहार के महत्व सबसे अलग बा। धनतेरस से भैया दूज ले चले वाला ई पूरा पाँच दिने के पर्व, परंपरा आ पारिवारिक जुड़ाव के जितल-जागता उदाहरण ह। आज के डिजिटल जमाना में भले LED लाइट आ फैंसी सजावट बढ़ गइल होखे, लेकिन माटी के दीया, घर लीप-पोत, गोबर के गोइठा, परसाद के खुशबू आ बम-पटाखा के आवाज आजो मन के भीतर तक उजास भर देला।
धनतेरस - नया शुरुआत के प्रतीक
दीपावली के पहिला दिन धनतेरस कहाला। भोजपुरिया घरन में एह दिन धातु के कवनों नवका समान खरीदे बिना काम ना चलेला। पहिले-घरे माटी के हांड़ी, सुराही, दीया खरीदे के रिवाज रहे। अब स्टील आ पीतल के बरतन के बाजार गरम रहेला। बड़का-बुजुर्ग कहेलन कि एह दिने खरीदला से घर में लक्ष्मी के बास होला।
देवी लक्ष्मी के आगमन – मुख्य दीपावली रात
मकान चाहे माटी के होखे चाहे सीमेंट वाला, दीपावली के सांझ के समय पूरा घर लीप-पोत के चमकावल जाला। हर आंगन में गोबर से अल्पना बनावल जाला, माटी के दीया के कतार सजावल जाला। भोजपुरिया समाज में दीपावली खाली पूजा ना, ई अपने घर-परिवार के संग-बैठकी के समय ह। पुरान गीत “आजु दीपावली रे बली घर-घर दीया बरे” कान में गूंजत रहेला।
गोवर्धन पूजा: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
दूसर दिन गोवर्धन पूजा होला। माटी से गोवर्धन बनाके ओह पर दूध-दही-चूड़ा चढ़ावल जाला। गोधन के मान सम्मान भोजपुरिया संस्कृति में बहुत ऊंच ह। खेत-खलिहान के पहरेदार के रूप में गोरु-मवेशी के पूजायल जाला।
भैया दूज: भाई-बहिन के अमिट संबंध
पाँचमे दिन भैया दूज पर बहिन अपना भाई के माथे पर टिका लगावेली, अंजुरी भर पानी देके रक्षा के वचन लेवेली। का शहर, का गाँव — चाहे मोबाइल चलs वाला बहिन होखे या खेत में काम करे वाली — ई परंपरा काहू ना छोड़ेला।
गाँव बनाम शहर – दीपावली के बदलत रंग-ढंग
गाँव में दीपावली आजो सामूहिक तरीके से मनावल जाला। एक घर में मिठाई बनल त दस घरे में बांटल जाला। सब एक दोसरा के घर जाला, भोजन करेला, गप-सप होखेला। शहर में भले सजावट बढ़ गइल होखे, लेकिन मेलजोल के भावना थोड़ा कम देखे के मिलेला। रोशनी त हर जगह बा, लेकिन मन के उजास कहीं-कहीं बुझा मिलेला।
भोजपुरिया समाज के असली पहचान ई बा कि त्योहार अकेले ना, “सब संगे-संगे” मनावल जाला।
आज के समय में दीपावली के असल संदेश
ई पर्व सिखावेला कि उजाला खाली बिजली वाला रोशनी से ना होखेला, बल्कि मन के मैल हटाके प्रेम, क्षमा आ भाईचारा बढ़ावे के नाम भी उजाला कहल जाला। पुरान बात बा — “जाहें दीया लाख जळे, दिल में प्रेम के दीप जरुरी”।
प्रसार भोजपुरी परिवार के ओर से शुभकामना संदेश
रउआ सभे के परिवार समेत शुभ दीपावली आ पांचो दिन वाला ई पावन पर्व पर अनंत शुभकामना। भगवान लक्ष्मी, गणेश आ गोवर्धन महाराज रउआ घर-आंगन में सुख-समृद्धि के वर्षा करसु।
“दीप जलत रहे, सुख पलत रहे,
भोजपुरी माटी के खुशबू सदा बसत रहे।”
🙏 जय भोजपुरिया संस्कृति, जय दीपावली! 🙏

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