धनतेरस: समृद्धि आ आस्था के पावन पर्व
धनतेरस, दीपावली से ठीक दू दिन पहिले आवे वाला पावन दिन ह। ई दिन न खाली सोना-चांदी खरीदे के परंपरा से जुड़ल बा, बल्कि धन्वंतरि भगवान के पूजा आ मइया लक्ष्मी के असीम आशीर्वाद के प्रतीक भी ह। हिंदू धर्म में धनतेरस के खास धार्मिक महत्त्व होला, ई दिन स्वास्थ्य, समृद्धि, आ सुख-शांति के आश्वासन देला।
धन्वंतरि भगवान के महिमा
धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि के पूजा बहुत जरूरी मानल जाला। पुराण अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के संग अवतरित भइल रहलन। एह दिन माटी के दीप जलाके, भगवान धन्वंतरि से रोग-रोग निवारण आ आयु बढ़ावे के आशीर्वाद मांगल जाला।
धनतेरस के पूजा में विशेष रूप से दस रंग के दीपक सजावल जाला, जे घर के अंधकार दूर करे आ सुख-समृद्धि ले आवे। भक्तलोग श्रद्धा आ भक्ति के साथे भगवान धन्वंतरि के आराधना करेला आ स्वास्थ्य के रक्षा खातिर विशेष उपाय करेला।
मइया लक्ष्मी के आराधना
धनतेरस पर मइया लक्ष्मी के पूजन के भी बहुत महत्व होला। लक्ष्मी माता धन, वैभव, आ सुख-शांति के देवी हईं। रउआँ चाहे छोट घर में रहीं या बड़ा, ई दिन घर के साफ-सफाई करके दीपक आ फूल से सजावल जाला। पूजा के समय सोना, चांदी, आ तांबे के बर्तन आ सजावटी सामान रखके लक्ष्मी माता के आमंत्रित कइल जाला।माना जाला कि जवन घर पर धनतेरस के दिन लक्ष्मी माता के भक्ति आ श्रद्धा से पूजन होखेला, ओह घर में आवे वाला वर्ष भरि खुशहाली आ समृद्धि बनल रहेला।
सोना-चांदी खरीदे के परंपरा
धनतेरस के दिन सोना-चांदी खरीदे के परंपरा बहुत पुरान ह। मान्यता बा कि जे आदमी धनतेरस पर सोना या चांदी खरीदेला, ओकरे घर में लक्ष्मी माता के विशेष कृपा रहेला। एह दिन खरीदल गइल सोना-चांदी सिर्फ धन के प्रतीक ना ह, बल्कि स्वास्थ्य आ सुख-शांति के भी संकेत ह।रउआँ चाहे आभूषण खरीदीं, चाहे छोट-छोट सिक्का या दीपक खरीद के पूजा में राखीं, ई दिन के महत्व बनल रहल जाला।
दीया-बाती के महिमा
धनतेरस के दिन घर आ आसपास के जगह पर दीया जलावल बहुत जरूरी होला। दीपक ना खाली अंधकार दूर करेला, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा आ खुशहाली भी ले आवेला। पुरान कथा के अनुसार, जवन घर में दीया के प्रकाश सबसे चमकदार होखेला, ओह घर में लक्ष्मी माता बसत रहेली।दीया के बाती आ तेल में शुद्धता रखके पूजा करल आ घर-आंगन सजावल रउआँ के घर में खुशहाली आ सुख के संचार करेला।
धनतेरस के धार्मिक महत्व
धनतेरस खाली धन आ समृद्धि के पर्व ना ह, बलुक ई स्वास्थ्य, आयु, आ रोग निवारण के प्रतीक भी ह। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि के पूजा आ मइया लक्ष्मी के आराधना से ना खाली धन के प्राप्ति होला, बल्कि घर आ परिवार पर सुख-शांति बनी रहेला।
एही दिन माटी के दीपक, सोना-चांदी, आ तांबे के बर्तन खरीदे आ पूजन में शामिल कइल जाला। ई सब समान आध्यात्मिक आ धार्मिक रूप से लाभकारी मानल जाली।
धनतेरस के विशेष उपाय
स्वच्छता: घर के हर कोना साफ राखल।
दीपक सजावल: विशेष रूप से पूजा स्थल पर दीपक जलावल।
सोना-चांदी के खरीदारी: आशीर्वाद आ समृद्धि खातिर।
धन्वंतरि पूजन: स्वास्थ्य आ रोग-मुक्ति खातिर।
भक्ति आ पूजा: मइया लक्ष्मी के प्रसन्न करे खातिर फूल, मिठाई, आ दीपक अर्पित कइल।
धनतेरस खाली धन के पर्व ना ह, बलुक ई आस्था, भक्ति, आ पुरनकी परंपरा के भी प्रतीक ह। जवन घर में भगवान धन्वंतरि आ मइया लक्ष्मी के पूजन श्रद्धा आ भक्ति से होखेला, ओह घर में सुख, समृद्धि आ स्वास्थ्य बनल रहेला।
सोना-चांदी के खरीद, दीपक के सजावट, आ पूजा-पाठ से धनतेरस के पावन दिन हर परिवार खातिर खुशहाली आ समृद्धि ले आवेला। एह पावन दिन पर रउआँ आपन घर आ मन के साफ राखीं, आ भगवान धन्वंतरि आ मइया लक्ष्मी के कृपा से संपन्न जीवन के सुख भोगीं।
